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About Deepak Astrologer

दीपक जी 20 सालों से एस्ट्रोलोजी में है!
             जीवन का मूल आधार गीता है! गीता पढने के बाद उसके विचारों को जीवन में उतार कर एक संतुलित आधार में जीवन जीना मेरा मकसद है! ईश्वर प्राकृतिक रूप से हमारे बीच में विद्यमान है! 84 लाख योनियों के बाद इंसान का शरीर मिलता है! प्राकृतिक रूप से ग्रहों की तरंगो के द्वारा इंसान के पास अच्छा और बुरा विचार पहुँचता है, इसीलिए इंसान को बुद्धि और विवेक दिया गया है उस विचार का विश्लेषण करने के लिए! माँ जब गर्भवती होती है तो बच्चे को पैदा होने में 9 महीने का समय लग जाता है और ग्रह भी 9 ही है! प्रत्येक महीने एक ग्रह अपना सॉफ्ट वेयर लोड करता है, जिससे की जीवन में दशा और महादशाओं से अच्छा और बुरा समय व्यक्ति पर आता है!

 

             ग्रहों के गणित के आधार पर मैत्री शत्रु और समभाव के आधार पर कुंडली का विश्लेषण होता है! भगवान् की विशेष कृपा दृष्टि से ही इस विद्या की प्राप्ति होती है, जो प्रभु के कार्यों में सहयोग करने जैसा होता है! जहाँ दुःख है, तकलीफें है, अड़चने है, यह सब ग्रहों के अच्छे और बुरे स्थान पर विराजमान होने पर वक्र अवस्था, अस्त व शत्रु ग्रह की दृष्टि या साथ होने पर महादशाओं, अन्तर दशाओं, प्रत्यंतर दशाओं, सूक्ष्म और योगिनी दशाओं के आधार पर कुंडली का विश्लेषण किया जाता है! यदि पूर्ण निष्ठां के साथ समाज की भलाई के लिए इस विद्या का प्रयोग किया जाए तो वह ईश्वर के कार्य में सहयोग होता है, इसलिए ईश्वर को भविष्यवक्ता से स्नेह होता है!

 

             20 वर्षों के अनुभव से इन ग्रहों के साथ आज एक दोस्ताना ताल्लुक लगता है कि जब भी ये किसी कि कुंडली के आधार पर अपनी तरंगों के द्वारा व्यक्ति के शरीर पर कैरियर, बिजनेस में अच्छा या बुरा असर डालने से पहले हमे उसका अनुभव कुंडली देखने के बाद पहले से हो जाता है! जिस प्रकार डॉक्टर एक्सरे कि रिपोर्ट पढ़ते है उसी प्रकार कुंडली हमारे सामने एक्सरे की तरह होती है, और जहाँ भी ग्रहों की अच्छी या बुरी दृष्टि पड़ती है या किसी भी प्रकार से हमे बुरे समय का आभास होता है! उसके लिए ग्रहों की शान्ति पूजा के माध्यम से जैसे डॉक्टर ओपरेशन करते है, किया जाता है! इस संसार में ईश्वर अच्छे और बुरे वक्त के लिए साधन और सोच का विस्तार करते है! यदि समय अच्छा हो तो अच्छे लोग और विचार मिलते है और यदि समय बुरा हो तो बुरे लोग और विचार मिलते है! बुराई में आकर्षण होता है इसलिए व्यक्ति तुंरत उसकी और आकर्षित होकर कार्य करता है, परन्तु अच्छाई में आकर्षण नही होता, उसके लिए व्यक्ति बहुत सारी सलाह या सोचने का कार्य करता है अच्छे कार्य में इसलिए बांधाएं आती है! ईश्वर की एक कंपनी है जिसका नाम सृष्टि है, हम ईश्वर से नित प्रतिदिन कुछ न कुछ मांगते है, परन्तु हमे मांगने से पहले यह सोचना चाहिए की हमारा उस कंपनी में क्या कुछ शेयर है, क्या हम कंपनी के कार्यों में हिस्सेदारी करते है? यदि मात्र कोई भी एक कार्य ईश्वर के कार्यों में सहयोग करने के प्रयास से किया जाए तो वह जीवन में इतना बड़ा बोनस देता है जिससे व्यक्ति को संस्कार, शान्ति, सुख समृधि और संतुलित जीवन मिलता है, जिससे शान्ति और आनंद का अनुभव मिलता है!

 

             मुझे जो ईश्वर ने यह कार्य सौपा है, मैं अपने शुद्ध अन्ताकरण से लोगो की तकलीफों को दूर करने में ईश्वर के सहयोग से ईश्वर के कार्यों में सहयोग करता हूँ! ईश्वर के अलावा कोई व्यक्ति पूर्ण नही है!

भवदीप
दीपक पंडित

 

 
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